24 May 2005

क्षणिकाएँ-1

  • प्राणायाम
घोंघा
बीमारियों का
जीवन समुद्र में
चलता है,
स्वास्थय जैसा
मोती,
योग और प्राणायाम की
सीपी में
पलता है!
***

  • बँटवारा

पानी की
एक बूँद का
जब विश्व में
बँटवारा किया गया,
कतार में
सबसे आगे
समुद्र,
पाया गया !
***


  • विश्वशान्ति
सचमुच,
बुद्धि से बड़ी भैंस है,
आदमी जान जाता
किसी का कुछ बिगाड़ देना
भैंस को नहीं आता,
काश !
भैंस का सिर्फ यह गुण
आदमी में आ जाता
आज विश्व में,
न्यूट्रान और हाइड्रोजन
बम नहीं बन पाता !

***

:: रमेश कुमार भद्रावले ::

3 Comments:

At 10 August, 2005, Anonymous Anonymous said...

पानी की बूँद और समुद्र के माध्यम से जो बात आपने कही है वह एकदम सटीक है।
-राममूर्ति सिंह अधीर, लखनऊ

 
At 13 March, 2006, Anonymous Anonymous said...

Samandar bhi hota hai pyasa kabhi kabhi,
Ek boond me bhi samandar hota hai kabhi kabhi,
Bhadrawaleji aap vakai gagar me sagar bharte hai,Bahut Bahut Badhai Aapko.
-Dr.Rajkumar Patil,
Manipal College of Medical Sciences,Pokhara,Nepal

 
At 02 April, 2006, Anonymous Anonymous said...

muze accha laga aapne pratikria bhaji iss prakar bhejte rahe. Dr. rajkumar bhai aap bhi kuch likhe muze adhik khushee hogi.
Thank's
R.K. Bhadrawale

 

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